राजस्थान में लंबे समय से लंबित त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर आखिरकार स्थिति साफ हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनावी कार्यक्रम (Election Schedule) की विस्तृत जानकारी पेश की, जिसके बाद अदालत ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं का निस्तारण कर दिया है।
तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रदेश में चुनावी शंखनाद अगस्त महीने से शुरू होने जा रहा है, जिसमें नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया सितंबर तक और पंचायत चुनाव 15 नवंबर 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।
आरक्षण और लॉटरी की समय-सीमा (OBC Reservation Update)
चुनावी कार्यक्रम की शुरुआत से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सीटों के निर्धारण को लेकर प्रक्रिया पूरी की जाएगी:
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5 अगस्त: ओबीसी सीटों के आरक्षण को लेकर ओबीसी आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।
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6 से 15 अगस्त: रिपोर्ट के आधार पर सीटों का आरक्षण और लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को पूरी तरह संपन्न किया जाएगा।
नगर निकाय चुनाव कार्यक्रम (Urban Local Body Elections)
नगर निकाय चुनावों को लेकर प्रक्रिया अगस्त के तीसरे सप्ताह से गति पकड़ेगी:
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17 अगस्त: नगर निकाय चुनावों का विस्तृत और आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
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22 अगस्त: इस तारीख से उम्मीदवार निकाय चुनावों के लिए अपना नामांकन (Nomination) दाखिल कर सकेंगे।
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20 सितंबर: इस तिथि तक नगर निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया को संपन्न करा लिया जाएगा।
पंचायत चुनाव कार्यक्रम (Rajasthan Panchayat Election Date)
निकाय चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद ग्रामीण क्षेत्रों की ‘गांव की सरकार’ चुनने की प्रक्रिया शुरू होगी:
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23 सितंबर: पंचायत चुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी जाएगी।
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15 नवंबर: आयोग द्वारा तय की गई समय-सीमा के अनुसार 15 नवंबर से पहले सभी चरणों के पंचायत चुनाव पूरे कराकर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त रुख: “अब नहीं मिलेगा अतिरिक्त समय”
इस पूरे मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया। एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
“सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कोर्ट में सौंपी गई इस तय समयसीमा के भीतर ही हर हाल में चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अब इसके बाद किसी भी परिस्थिति में चुनाव टालने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।”
अदालती फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए याचिकाकर्ता और कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान राज्य सरकार चुनाव कराने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन हाईकोर्ट की सख्ती के चलते उसे यह चुनावी कार्यक्रम घोषित करना पड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ की वकालत करती है, उसे पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव भी एक साथ ही संपन्न कराने चाहिए थे।
इस अदालती आदेश और घोषणा के बाद पूरे राजस्थान में राजनीतिक आचार संहिता की सरगर्मियां तेज हो गई हैं, और दोनों ही प्रमुख दल अब जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं।